बुधवार, 29 जून 2016

मैं

मैं देश की तरक्की चाहता हूँ ..
     लेकिन टैक्स चोरी मैं ही करता हूँ ।
मैं स्वच्छ भारत मिशन में साथ हूँ ..
    कूड़ा सड़कों में नदियों में मैं ही फेकता हूँ ।
मैं काला धन भारत में लाना चाहता हूँ ..
     मैं ही तो रिश्वत लेता हूँ ।
मैं सरकारी टीचर बनना चाहता हूँ ..
     लेकिन खुद के बच्चों को पब्लिक स्कूल में पढता हूँ ।
मैं ही तो हूँ जो अपनी माँ बहन को इज्जत देना चाहता हूँ .
  मैं ही बात बात में तेरी माँ तेरी बहन कहता हूँ ।
मैं ही गाय को माँ कह कर अनशन करता हूँ ..
     मैं ही बूचड़खाने में मांस की खरीददारी करता हूँ ।
मैं ही पत्थर , कब्र को पूजता हूँ  .....
    मैं ही अपने माँ पिता को वृद्धा आश्रम छोड़ आता हूँ ।
मैं ही खुद के बच्चों को समझा पाने में असमर्थ होता हूँ ..
   मैं ही हर किसी को सलाह देता फिरता हूँ ।
मैं ही हर नवरात्र लड़की को पूजते हूँ ..
     मैं ही उस नन्हे भ्रूण हो मार देता हूँ ।
मैं ही दहेज़ प्रथा को अभिशाप मानता हूँ ..
     मैं ही तो दहेज़ चाहता हूँ ।
मैं ही तो मिलावट करता हूँ ..
     फिर मैं ही शुद्ध चाहता हूँ ।
मैं ही जमीन काट ,जंगल काट घर बना रहा हूँ ..
     मैं ही पर्यावरण की चिंता करता हूँ ।
मैं ही पत्नी को अर्धागिनी मानता हूँ ..
     मैं ही पत्नी से एक सलाह लेना तक नहीं चाहता हूँ ..।
मैं ही तो राजा हूँ , रंक मैं ही तो हूँ ..
मैं ही जनतन्त्र , लोकतंत्र मैं ही हूँ ..।

माणिक्य बहुगुना / चंद्रप्रकाश /पंकज

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