गुरुवार, 30 जून 2016

प्रेम

मुझे इतने प्रेम से गले मत लगाओ ..
मुझे देश के लिए लड़ना है
मैं कमज़ोर न पड़ जाऊँ ..
तुम ईश्वर से प्रार्थना करना ।
मैं अगर मर जाऊँ लड़ते लड़ते ..
मुझे बस एक बार छू लेना  ..
मेरे बच्चों को मुझे मत दिखाना ..
क्या पता मैं उठ जाऊँ ?
तुम दूसरा विवाह कर लेना ..
अगर मैं ना लौटा तो ..
मेरा पैसा , घर तुम्हारे नाम पे है ..
तुम ख़ुश रहना  ऐसे ही ।
मेरी रुह तुम्हारा दुःख सहन नहीं कर पाएगी ...
तुम मेरे बचे अंगों को जलाना मत ,
दफनाना मत , दान कर देना ।
मैं तुम्हारी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाया ...
ना ही तुम्हें प्यार दे पाया जिसपे तुम्हारा हक़ था ..
मैं तुम्हारा अपराधी बन सकता हूँ .
देश का नहीं ।
तुम मेरी किताबें , तुम्हारे प्रेम पत्र जलाना मत ..
मेरी और तुम्हारे कुछ फोटोज हैं उन्हें फेंकना मत ..
तुम खिडकियाँ खोले रखना मैं तुम्हें देखने आया करूँगा ...
हवा , पानी , रोशनी , अंधेरा बन कर ।
माणिक्य बहुगुना

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