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तुम देख रही हो ना ?

तुम से हजारों बार मिला हूँ ..
        हर बार मिलने के लिए बेचैन रहता हूँ ..
सुन रही हो ना तुम ?
       वो देखो ..
तुम देख रही हो ना ?
      सूरज जो शर्मा रहा है ..
हम को देख और छुप गया है माँ के पल्लू से ..
         वो दूर खड़े हंसों के जोड़ों को देख रही हो ना..?
हमें उन से सीखना चाहिए ।
      प्रेम बिना आवरण का विशुद्ध ..
          देखो पर्वतों का आकाश को चूमना ....
तितलियों का पराग में मद मस्त होना ..
          उस पेड़ के पत्तों के राग सुनो ...
तुम्हारी तरह गाते हैं ...
           चलो मैं तुम को तुम मुझ को पढ़ो ..
हँसो तुम हँसो मुझे पढ़ कर ..
            तुम्हारा चन्दन देह ..
  दिल मेरी देह की औषधी है ।
        बस यूँ ही मिलो बस ...
               और यूँ ही हँसो ...
माणिक्य बहुगुना

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प्यार

वो लड़की बहुत अच्छी लगती है ..
जो मेरे यादों में बसती है ।
मेरे आँखों की नमी देख ...
जो खुद रो पड़ती है ।
जो मेरे हँसने में ..
खुद हँस पड़ती है ।
जिसे में अंतस में समेटे रहता हूँ ...
उस बात को बोल देती है ।
वह जो मेरी खुसी में ..
खुद की खुसी जोड़ देती है ।
उससे बातें करना अच्छा लगता है ..
और मेरे दिल को ठण्डक देती है ।
हजारों लाखों में ..
बस वही अच्छा लगती है ।
लेकिन क्यों ?
नहीं जनता ।
उसे में महसूस करता हूँ---------
सूरज की लाली में ..
रात काली में ।
पूनम में , अमावस में ..
जल में,थल में ।
पानी की घूँट में ..
दिन रात में ।
भोजन में , भजन में ..
आरती में वन्दना में ।
सोने में उठने में ..
चिड़ियों के चहकने में ।
दिन की कड़क धूप में..
बादलों की छाँव में ।
सब में , शराब में ..
गुलसन में , शबनम में ।
प्रेम में प्रेमी जोड़ों में ..
गुस्से में लड़ाई में ।
पंखे की हवा में .
रोशनदानों में ।
रौशनी में , अँधेरे में ...
सुबह सबेरे में ।
फूलों में पत्तें में ...
सरोवर झीलों में ।
पानी में , भोजन में ..
किताब की हर शब्द में ।
गम में खुसी में ..
अकेलेपन में , साथ में ।
गीतों की धुन में ..
सरगम की तानों म…

प्रेम

मुझे इतने प्रेम से गले मत लगाओ ..
मुझे देश के लिए लड़ना है
मैं कमज़ोर न पड़ जाऊँ ..
तुम ईश्वर से प्रार्थना करना ।
मैं अगर मर जाऊँ लड़ते लड़ते ..
मुझे बस एक बार छू लेना  ..
मेरे बच्चों को मुझे मत दिखाना ..
क्या पता मैं उठ जाऊँ ?
तुम दूसरा विवाह कर लेना ..
अगर मैं ना लौटा तो ..
मेरा पैसा , घर तुम्हारे नाम पे है ..
तुम ख़ुश रहना  ऐसे ही ।
मेरी रुह तुम्हारा दुःख सहन नहीं कर पाएगी ...
तुम मेरे बचे अंगों को जलाना मत ,
दफनाना मत , दान कर देना ।
मैं तुम्हारी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाया ...
ना ही तुम्हें प्यार दे पाया जिसपे तुम्हारा हक़ था ..
मैं तुम्हारा अपराधी बन सकता हूँ .
देश का नहीं ।
तुम मेरी किताबें , तुम्हारे प्रेम पत्र जलाना मत ..
मेरी और तुम्हारे कुछ फोटोज हैं उन्हें फेंकना मत ..
तुम खिडकियाँ खोले रखना मैं तुम्हें देखने आया करूँगा ...
हवा , पानी , रोशनी , अंधेरा बन कर ।
माणिक्य बहुगुना

शायरी

1
तुम्हारी आँखे सब बोलती हैं लबों को मत बोलने दो ....
अभी अभी तो प्यार में खोया हूँ खो जाने दो ....
तुम मुझे मदहोश कर देती हो ...
ये मदहोशी के जाम मुझे पीने दो ....।।
                       2
वो मुझ से हर बात ख़फ़ा रहता ....
वो हर बात में फ़ायदे की बात करता ...
फिर भी न जाने क्यों उसकी आँखों से लगता ......
वो प्यार अभी भी मुझीसे ही करता ...