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आपदा

कहर !
       प्रकृति का या मानव का प्रकृति पर ?
कौन निश्चित करेगा ?
कौन मरेगा , कौन बचेगा ..?
      पर्वत खोद कर बेच डाले ..
      जंगल जला खाक कर डाले ।
सोचता हूँ मैं सुखी रहूँगा किसी को मारकर ..
नहीं मिलेगा तुझे भी सुख औरों को काटकर ।

दोहन -
       प्रकृति या खुद का ?
खुद बचना है तो बचाना होगा .
प्रकृति को बचा कर खुद बचना होगा ।

प्रलय -
       
         क्या है ?
प्रकृति का कहर , मानव का कहर मानव पर ?
 
खुद को बचाने की कोशिश  कर रहा है मानव .
ना जाने फिर क्यों प्रकृति उजाड़ रहा है मानव ।
प्रलय । विकाश का , विज्ञान का ..
मंजर है हर कदम विनाश का ।।

माणिक्य / चंद्र प्रकाश / पंकज

टिप्पणियाँ

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प्यार

वो लड़की बहुत अच्छी लगती है ..
जो मेरे यादों में बसती है ।
मेरे आँखों की नमी देख ...
जो खुद रो पड़ती है ।
जो मेरे हँसने में ..
खुद हँस पड़ती है ।
जिसे में अंतस में समेटे रहता हूँ ...
उस बात को बोल देती है ।
वह जो मेरी खुसी में ..
खुद की खुसी जोड़ देती है ।
उससे बातें करना अच्छा लगता है ..
और मेरे दिल को ठण्डक देती है ।
हजारों लाखों में ..
बस वही अच्छा लगती है ।
लेकिन क्यों ?
नहीं जनता ।
उसे में महसूस करता हूँ---------
सूरज की लाली में ..
रात काली में ।
पूनम में , अमावस में ..
जल में,थल में ।
पानी की घूँट में ..
दिन रात में ।
भोजन में , भजन में ..
आरती में वन्दना में ।
सोने में उठने में ..
चिड़ियों के चहकने में ।
दिन की कड़क धूप में..
बादलों की छाँव में ।
सब में , शराब में ..
गुलसन में , शबनम में ।
प्रेम में प्रेमी जोड़ों में ..
गुस्से में लड़ाई में ।
पंखे की हवा में .
रोशनदानों में ।
रौशनी में , अँधेरे में ...
सुबह सबेरे में ।
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शायरी

1
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                       2
वो मुझ से हर बात ख़फ़ा रहता ....
वो हर बात में फ़ायदे की बात करता ...
फिर भी न जाने क्यों उसकी आँखों से लगता ......
वो प्यार अभी भी मुझीसे ही करता ...

प्रेम

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मेरे बच्चों को मुझे मत दिखाना ..
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तुम दूसरा विवाह कर लेना ..
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तुम ख़ुश रहना  ऐसे ही ।
मेरी रुह तुम्हारा दुःख सहन नहीं कर पाएगी ...
तुम मेरे बचे अंगों को जलाना मत ,
दफनाना मत , दान कर देना ।
मैं तुम्हारी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाया ...
ना ही तुम्हें प्यार दे पाया जिसपे तुम्हारा हक़ था ..
मैं तुम्हारा अपराधी बन सकता हूँ .
देश का नहीं ।
तुम मेरी किताबें , तुम्हारे प्रेम पत्र जलाना मत ..
मेरी और तुम्हारे कुछ फोटोज हैं उन्हें फेंकना मत ..
तुम खिडकियाँ खोले रखना मैं तुम्हें देखने आया करूँगा ...
हवा , पानी , रोशनी , अंधेरा बन कर ।
माणिक्य बहुगुना